गणेशोत्सव के दौरान 10 दिन तक होगी विशेष आराधना, लगेगा भक्तों का तांता, इस बार विशेष मुहूर्त में गणेश चतुर्थी का पर्व

रेहटी । आज मंगलकर्मा गणेश के आगमन के साथ ही सुखद अनुभूती का संचार भक्तों के मन में होने लगेगा। आज गणेशजी की स्थापना के बाद से लेकर 10 दिन तक उनकी विशेष पूजा अर्चना होगी। शहर सहित जिले भर में जगह जगह लगने वाली गणेश जी की झांकी के पांडाल इस बात को बताने के लिए काफी है कि इस पर्व को लेकर लोगों के मन मे कितना उत्साह है। जानकारी के अनुसार शहर एवं आसपास में 15 स्थानों पर पंडालों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाना है। यह संख्या बढ भी सकती है। गणेश प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों के मन में इस बार उत्साह है उनका कहना है कि पिछले दो सालों में उन्हें मंदी के दौर से गुजरना पडा। इस बार ईश्वर ने सभी की सुनी है। पानी जैसी समस्या से भी जल्दी ही निजात मिला । आज से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से 10 दिवसीय गणेश उत्सव का प्रारंभ होने जा रहा है जो 9 सितंबर तक चलने वाला है। इस साल गणेश चतुर्थी तिथि 31 अगस्त बुधवार के दिन पड़ रही है। अनंत चतुर्दशी के पावन दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जावेगा।

अभिजीत मुहुर्त में स्थापना करना होगा मंगलकारी-

श्रीगणेश स्थापना बुधवार को रवियोग,अभिजीत मुहूर्त में करना शुभ- मंगलकारी रहेगा। शास्त्रानुसार श्री गणेश जी का जन्म भादपद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी को हुआ था। इस वर्ष श्री गणेश चतुर्थी 31 अगस्त बुधवार को रवि योग में शुभ मंगलकारी श्रेष्ठ योग बन रहा हैं। मान्यता है कि श्री गणेश जी का जन्म दोपहर में हुआ था। इसलिए सुबह 11 बजकर 05 बजे से लेकर के दोपहर 12 बजकर 20 बजे तक शुभ अभिजीत मुहूर्त में श्री गणेश स्थापना करना शुभ एवं मंगलकारी होगा।

मूर्तिकारों की मेहनत ने जैसे जीवंत की प्रतिमाएं- 

शहर में जगह -जगह बन रही गणेश प्रतिमाओं को फायनल टच दिया गया। भक्तों के लिए 10 फिट तक की प्रतिमाएं बनाई गई है। जो पिछले 2 साल कोरोना के कारण प्रतिबंधित थी। प्रतिमा बनाने वालों में मूर्तिकार का कहना है कि बस बार 50 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक की प्रतिमाओं को बनाया गया है। लेकिन फिर भी हमारे कलाकारों ने लगातार मेहनत कर मूर्तियों को अंतिम रूप दिया है। उन्होंने बताया कि आकर्षक एवं जीवंत चित्रण वाली मूर्तियों के निर्माण के कारण रेहटी के अलावा अन्य स्थानों से भी लोग मूर्तियों को लेने के लिए आते है। 

गणपति पूजा के समय रखें इस बातों का विशेष ध्यान-

  1. गणेश जी की मूर्ति पर तुलसी और शंख से जल नहीं चढ़ाएं।
  2. दूर्वा और मोदक के बिना पूजा अधूरी रहती है।
  3. गणपति के पसंदीदा फूल भेंट करें। जिनमें मल्लिका, कनेर, कमल, चम्पा, मौलश्री,गेंदा, गुलाब हो।
  4. गणपति के पसंदीदा पत्ते भेंट करें जैसे शमी, दूर्वा, धतूरा, कनेर,केला, बेर, मदार और बिल्व पत्र।
  5. चमड़े की चीजें बाहर रखकर पूजा करें और भगवान को अकेले कभी न छोड़ें।
  6. स्थापना के बाद मूर्ति को इधर-उधर न रखें, यानी हिलाएं नहीं।
Mukesh Mehta
Mukesh Mehta

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