सीहोर/रेहटी
मुकेश मेहता
। शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों देर रात तक बज रहे तेज आवाज वाले डीजे लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। शादी-विवाह एवं अन्य आयोजनों में नियमों को दरकिनार कर रात्रि 11 से 12 बजे तक, कई स्थानों पर उससे भी अधिक समय तक, अत्यधिक ध्वनि में डीजे बजाए जा रहे हैं। इससे बुजुर्ग, छोटे बच्चे, बीमार व्यक्ति और विशेष रूप से बोर्ड परीक्षा दे रहे विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तेज ध्वनि के कारण घरों की खिड़कियां तक कंपन करने लगती हैं। रात्रि में आराम और नींद हराम हो रही है। हृदय रोगियों, नवजात शिशुओं और वृद्धजनों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है, क्योंकि इस समय बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं और विद्यार्थियों को देर रात तक पढ़ाई करनी पड़ती है।

अभिभावकों ने चिंता जताते हुए कहा कि परीक्षा के इस महत्वपूर्ण दौर में शांति और अनुशासन की आवश्यकता होती है, लेकिन तेज ध्वनि प्रदूषण से बच्चों की एकाग्रता भंग हो रही है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने से उनका मानसिक संतुलन और स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। इससे परीक्षा परिणाम पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।

नियमों की खुलेआम अनदेखी
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए शासन द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके अनुसार रात्रि 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे संचालन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद शहर में नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे आयोजकों के हौसले बुलंद हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस गंभीर समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला प्रशासन की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

नागरिकों की मांग — सख्त कार्रवाई हो
शहरवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रात्रि 10 बजे के बाद डीजे संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए, उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना एवं कानूनी कार्रवाई की जाए तथा परीक्षा अवधि में विशेष निगरानी रखी जाए। साथ ही प्रशासन से अपील की गई है कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण हेतु सघन अभियान चलाया जाए, ताकि विद्यार्थियों और आमजन को राहत मिल सके।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस समस्या का संज्ञान लेकर प्रभावी कदम उठाता है और शहरवासियों को राहत दिलाता है।

Mukesh Mehta
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