14 सितंबर को गणेश स्थापना, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन — सोमवार को गणेश चतुर्थी पड़ना भी विशेष संयोग

 

मुकेश मेहता

सीहोर। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष गणेश उत्सव कई मायनों में विशेष रहने वाला है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेशोत्सव इस बार कैलेंडर की गणना के अनुसार 14 सितंबर से 25 सितंबर तक 12 दिनों के विस्तार में मनाया जाएगा। करीब नौ वर्षों बाद पंचांग में तिथियों के घट-बढ़ के कारण ऐसा विशेष संयोग बन रहा है।

 

बाला जी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र, सीहोर के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा के अनुसार धार्मिक दृष्टि से गणेश उत्सव का मुख्य पर्व चतुर्थी से चतुर्दशी तक 10 तिथियों का माना जाता है, लेकिन तिथि वृद्धि के कारण इस बार स्थापना और विसर्जन सहित कैलेंडर अवधि 12 दिनों की रहेगी।

 

14 सितंबर को होगी गणपति स्थापना

 

पंडित शर्मा ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 5:22 बजे प्रारंभ होकर 15 सितंबर को सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। इसी दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना कर पूजा-अर्चना करेंगे।

 

गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक

गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:20 से दोपहर 1:48 बजे तक

गोधूलि पूजा मुहूर्त: शाम 6:42 से 7:05 बजे तक

 

सोमवार को गणेश चतुर्थी, पिता-पुत्र का शुभ संयोग

 

इस वर्ष गणेश चतुर्थी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और भगवान गणेश को भगवान शिव का पुत्र माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दृष्टि से शिव-पुत्र गणेश की आराधना का यह संयोग धार्मिक रूप से विशेष और शुभ माना जा रहा है।

 

चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता

 

पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्जित माना गया है। 14 सितंबर को सुबह 9:12 बजे से रात 8:58 बजे तक चंद्रमा के दर्शन से बचने की सलाह दी गई है। मान्यता है कि इस अवधि में चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ सकता है।

 

ईशान कोण या पूर्व दिशा में करें स्थापना

 

गणेश प्रतिमा की स्थापना के लिए घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) अथवा पूर्व दिशा को शुभ माना गया है। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की नई प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजन किया जा सकता है।

 

दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करें

 

भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक अथवा बेसन के लड्डू, लाल फूल विशेषकर गुड़हल, अक्षत और शमी के पत्ते अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गणपति की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

 

पंडित सौरभ गणेश शर्मा

ज्योतिषाचार्य, बाला जी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र

शास्त्री कॉलोनी, स्टेशन रोड, सीहोर

मोबाइल: 9229112381

Mukesh Mehta
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