इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन से भोपाल-इटारसी के व्यस्त रेल मार्ग का मिलेगा विकल्प, सलकनपुर-रेहटी-बुधनी क्षेत्र को भी होगा बड़ा फायदा

 

मुकेश मेहता | बुधनी

 

बुधनी। आने वाले वर्षों में बुधनी की पहचान सिर्फ भोपाल-इटारसी रेल मार्ग के स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्से को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रेल केंद्र के रूप में हो सकती है। इंदौर-बुधनी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर से बुधनी की सीधी रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे इंदौर से नर्मदापुरम, जबलपुर और आगे पूर्वी मध्यप्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों को भोपाल होकर जाने की निर्भरता कम करने वाला वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।

 

केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में इंदौर (मांगलियागांव)-बुधनी नई रेल लाइन को मंजूरी दी थी। परियोजना की स्वीकृत लंबाई करीब 205.5 किलोमीटर है। इसका उद्देश्य इंदौर को बुधनी से सीधे जोड़ना और भोपाल-इटारसी के व्यस्त मार्ग तथा बुधनी-बर्केड़ा के घाट सेक्शन के लिए वैकल्पिक रेल मार्ग तैयार करना है।

 

बुधनी बनेगा नए रेल कॉरिडोर का महत्वपूर्ण सिरा

 

प्रस्तावित रेल लाइन बुधनी के मौजूदा रेलवे यार्ड से शुरू होकर इंदौर के मांगलियागांव क्षेत्र से जुड़ेगी। परियोजना से सीहोर, देवास और इंदौर जिलों के कई ऐसे क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, जहां अभी सीधी रेल सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं है। सरकारी परियोजना दस्तावेजों में नसरुल्लागंज, खातेगांव और कन्नौद जैसे क्षेत्रों को भी इससे लाभ मिलने की बात कही गई है।

 

इस परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर से पूर्वी और मध्य मध्यप्रदेश की ओर रेल आवागमन के लिए एक नया विकल्प तैयार होगा। इससे मौजूदा भोपाल-इटारसी रेल मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

 

जंक्शन की भूमिका को लेकर बढ़ी उम्मीद

 

बुधनी स्टेशन पहले से ही महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर स्थित है। इंदौर-बुधनी नई लाइन के जुड़ने के बाद यहां रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। नई लाइन के साथ स्टेशन और यार्ड से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है।

 

हालांकि, बुधनी को आधिकारिक रूप से कब और किस स्वरूप में ‘जंक्शन’ का दर्जा दिया जाएगा, इसकी अंतिम घोषणा रेलवे स्तर से होना बाकी है। लेकिन नई लाइन के जुड़ने के बाद बुधनी की परिचालन भूमिका निश्चित रूप से बढ़ने की संभावना है।

 

नई स्टेशन बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम

 

बुधनी में स्टेशन से जुड़े नए इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। नई सुविधाओं के विकसित होने के बाद यात्रियों को बेहतर स्टेशन परिसर, आवागमन और रेल परिचालन सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

 

नई रेल लाइन के साथ आधुनिक रेलवे ढांचे का निर्माण परियोजना के विभिन्न हिस्सों में जारी है। जनवरी 2026 में RVNL ने परियोजना की एक महत्वपूर्ण सुरंग में 100 मीटर खुदाई पूरी होने की जानकारी दी थी। परियोजना में दो प्रमुख सुरंगें प्रस्तावित हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई करीब 9.88 किलोमीटर है।

 

205.5 किमी की रेल लाइन में इंजीनियरिंग का बड़ा काम

 

इंदौर-बुधनी रेल परियोजना केवल एक नई रेल लाइन नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग कार्यों वाला कॉरिडोर है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार इसमें—

 

– 80 बड़े पुल

– 99 छोटे पुल

– 138 रोड अंडरब्रिज

– 5 रोड ओवरब्रिज

– 2 लंबी सुरंगें

– 18 नए रेलवे स्टेशन

– बड़े वायाडक्ट और अन्य रेल इंफ्रास्ट्रक्चर

 

का निर्माण शामिल है।

 

परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है। सितंबर 2026 में RVNL की अधिसूचना में इंदौर, देवास और सीहोर जिलों में इंदौर-बुधनी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।

 

इंदौर-जबलपुर के बीच भी घटेगी दूरी

 

इस रेल लाइन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि इसके चालू होने पर इंदौर से जबलपुर की रेल दूरी करीब 68 किलोमीटर तक कम हो सकती है। केंद्र सरकार की परियोजना स्वीकृति में भी वर्तमान भोपाल मार्ग की तुलना में 68 किलोमीटर की दूरी कम होने का उल्लेख किया गया था। परियोजना से यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी का लक्ष्य है।

 

सलकनपुर और आसपास के क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष लाभ

 

नई रेल लाइन का प्रभाव केवल बुधनी और इंदौर तक सीमित नहीं रहेगा। बुधनी-सलकनपुर-रेहटी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, व्यापार और आवागमन को भी इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी धाम आने वाले यात्रियों के लिए बुधनी क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से आगे की सड़क कनेक्टिविटी का उपयोग आसान हो सकता है।

 

विशेषकर इंदौर, देवास और पश्चिमी मध्यप्रदेश से आने वाले यात्रियों के लिए यह नया रेल कॉरिडोर एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा।

 

भोपाल होकर जाने की मजबूरी होगी कम

 

अभी इंदौर से बुधनी और आगे नर्मदापुरम-जबलपुर दिशा में रेल यातायात के लिए मौजूदा नेटवर्क में भोपाल-इटारसी सेक्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इंदौर-बुधनी लाइन इस निर्भरता को कम करने वाला वैकल्पिक मार्ग तैयार करेगी।

 

सरकार ने परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य ही भोपाल-इटारसी के व्यस्त रेल मार्ग और बुधनी-बर्केड़ा के घाट सेक्शन को बायपास करते हुए सीधा रेल संपर्क उपलब्ध कराना बताया है।

 

क्षेत्र के लिए सिर्फ रेल लाइन नहीं, विकास का नया रास्ता

 

रेलवे की यह परियोजना पूरी होने के बाद इसका असर यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा। नए रेल मार्ग से माल परिवहन, कृषि उपज, औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय व्यापार को भी बेहतर परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है।

 

परियोजना के अक्टूबर 2025 के सरकारी प्रगति विवरण में इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन की लक्ष्य पूर्णता सितंबर 2030 दर्ज की गई थी। उस समय परियोजना की भौतिक प्रगति 25 प्रतिशत बताई गई थी।

 

रेलवे के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद बुधनी पश्चिमी मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश के मध्य-पूर्वी हिस्से के बीच एक महत्वपूर्ण रेल कड़ी के रूप में उभर सकता है।

Mukesh Mehta
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