जिला स्तरीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम आयोजित

महर्षि श्री अरविन्द के 150वें जन्म वर्ष (सार्धशती) पर पूरे प्रदेश में 1 से 31 अगस्त तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। इस अवसर पर शासकीय चन्द्रशेखर आजाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीहोर में “महर्षि अरविंद का जीवन अध्यात्म व राष्ट्रीयता” विषय पर जिला स्तरीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) विभाष उपाध्याय तथा विधायक सुदेश राय सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में सभी अतिथियों को तिलक कर एवं शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के पश्चात महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधो के पौधे लगाए गए।

 

इस अवसर पर जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष उपाध्याय ने कहा कि श्री अरविन्द घोष एक महान योगी और दार्शनिक के अलावा लेखक, चिंतक तथा विचारक भी थे। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का मार्गदर्शन करते रहे। उनके दर्शनशास्त्र के अध्ययन का पूरे विश्व पर प्रभाव रहा है। उन्होंने वेद, उपनिषद आदि ग्रंथों पर टीका के साथ ही योग साधना पर मौलिक ग्रंथ लिखे। खासकर उन्होंने डार्विन जैसे जीव वैज्ञानिकों के सिद्धांत से आगे चेतना के विकास की एक कहानी लिखी और समझाया कि किस तरह धरती पर जीवन का विकास हुआ। श्री अरविन्द की प्रमुख कृतियां लेटर्स ऑन योगा, सावित्री, योग समन्वय, दिव्य जीवन, फ्यूचर पोयट्री और द मदर हैं। इंग्लैंड से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात श्री अरविन्द घोष भारत लौटे। उनके ज्ञान तथा विचारों से प्रभावित होकर गायकवाड़ नरेश ने उन्हें बड़ौदा (अब वडो़दरा) में अपने निजी सचिव के तौर पर आमंत्रित किया। जिसके बाद श्री अरविन्द अनेक क्रांतिकारियों से मिले।

 

उपाध्याय ने कहा कि हमे गर्व है कि हम ऐसे देश में पैदा हुए जहां श्री अरविन्द जैसे महान व्यक्तित्व के धनी तथा शिक्षा, राजनीति और अध्यात्म में सर्वोच्च शिखर प्राप्त करने वाले महान व्यक्ति का जन्म हुआ। भारत की आज़ादी के पश्चात श्री अरविन्द का देहांत 5 दिसंबर 1950 को हुआ। पॉन्डिचेरी आश्रम पर 9 दिसंबर को उनके पार्थिव शरीर को समाधि दी गई। कार्यक्रम में श्री उपाध्याय ने अनेक स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों द्वारा भारत की आजादी में दिए गए योगदान का भी वर्णन किया।

 

कार्यक्रम में कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर ने श्री अरविन्द घोष की जीवनी पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्री अरविन्द के पिता का मानना था कि अंग्रेजो का जीवन ही सर्वश्रेष्ठ जीवन है, इसलिए उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई के लिए इंग्लेण्ड भेजा। श्री अरविन्द ने लंदन में रहकर ग्रीक, लेटिन सहित अनेक विदेशी भाषाओं को अध्ययन किया। पिता की मंशानुसार उन्होंने आईसीएस (वर्तमान आईएएस) की परीक्षा दी और उसे पास भी किया। लेकिन वह भी उन्हें पसंद नही आने पर वे बड़ोदा राज्य की सर्विस से जुड़े। अपने जीवन की उच्च शिखर तक पहुंचने के बाद भी उन्हें ये सब कुछ ठीक नही लगा। तब उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ चल रहे आंदोलनों में हिस्सा लेना शुरू किया और बंगाल विभाजन तथा अलीपुर बम विस्‍फोट जैसे आंदोलन मे अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में भी अपना एक सर्वोच्च स्थान बना लेने के बाद वे अध्यात्म की ओर अग्रेषित हुए। तब वे पाण्डुचेरी पहुंचे और अध्यात्म के बारे में जानना और समझना शुरू‍ किया। उन्होंने किसी नए धर्म की स्थापना करने की जगह हमारे वेद, उपनिषद और भगवत गीता जैसे वेदों का ही गहराई से अध्ययन किया। कार्यक्रम को सीहोर नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रिंस राठौर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में श्री राजकुमार गुप्ता, जन अभियान परिषद के विभागीय समन्वयक श्री वरुण आचार्य, जिला समन्वयक श्री पारुल उपाध्यायसहित प्रफुस्टन समितियों के सदस्य में आमजन उपस्थित थे।

Mukesh Mehta
Mukesh Mehta

सीहोर और आसपास के क्षेत्रों की ताजा एवं महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने वाला डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है। हमारा उद्देश्य स्थानीय मुद्दों, जनसमस्याओं, सामाजिक गतिविधियों और क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को निष्पक्ष, जिम्मेदार और सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।

हम राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, खेल, धर्म, सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय घटनाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों की खबरें प्रकाशित करते हैं।

हमारा प्रयास है—आप तक सही खबर, सही समय पर पहुंचाना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *