आठ किसानों की भूमि पर अतिक्रमण का मामला, वन और राजस्व विभाग की चुप्पी से ग्रामीण आक्रोशित


बुधनी/सीहोर
मुकेश मेहता
9425342666

बुधनी तहसील के ग्राम बायां में सागौन के हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई और जमीन पर कब्जे का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के पास स्थित खेतों में 50 से अधिक सागौन के पेड़ काटकर उनका परिवहन भी कर लिया गया, जबकि जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

पीड़ित किसानों का आरोप है कि जबलपुर से आए एक व्यक्ति ने पास की जमीन खरीदने के बाद उनकी निजी भूमि एवं राजस्व भूमि पर भी कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, जमीन पर खड़े सागौन के पेड़ों को काटकर उसे खेत का रूप दे दिया गया। जब किसान अपने खेत पर पहुंचे तो वहां पेड़ों की जगह समतल की गई जमीन और कटे हुए पेड़ों से की गई तार फेंसिंग देख उनके होश उड़ गए।

630 सागौन वृक्ष थे खड़े

किसानों के अनुसार उनकी भूमि वर्षों से परती पड़ी थी, जिस पर लगभग 630 सागौन के वृक्ष खड़े थे। वर्ष 2010 में विधिवत अनुमति लेकर कुछ वृक्षों की कटाई की गई थी और नियमानुसार पांच गुना पौधारोपण भी किया गया था। इसके बावजूद अब शेष पेड़ों की अवैध कटाई कर दी गई है।

प्रभावित किसानों का विवरण

मामले में जिन किसानों की भूमि प्रभावित बताई जा रही है, उनमें प्रमुख रूप से –

रामचरण पिता रघुनाथ सिंह (खसरा नं. 60, रकबा 1.1570 हे.)

रमेश पिता कालूराम (खसरा नं. 61/3, रकबा 0.178 हे.)

मेहताब सिंह पिता चेनसिंह (खसरा नं. 61/6, रकबा 0.132 हे.)

उत्तम सिंह पिता नाथूराम (खसरा नं. 61/4, रकबा 0.178 हे.)

गंगाबाई पत्नी कालूराम व राजकली पुत्री कालूराम (खसरा नं. 61/2, रकबा 0.178 हे.)

शेरकुंवर व रतनकुंवर (खसरा नं. 61/1, रकबा 0.260 हे.)

गजराज सिंह पिता चेनसिंह (खसरा नं. 61/5, रकबा 0.132 हे.)


कुल आठ किसानों की जमीन इस विवाद की जद में बताई जा रही है।

आवेदन के बाद भी कार्रवाई नहीं

पीड़ित किसानों ने सामूहिक रूप से थाना, वन विभाग और राजस्व विभाग को लिखित आवेदन दिए हैं। आवेदन दिए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु थाना प्रभारी एवं रेंज अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।

तहसील से नोटिस की चर्चा

सूत्रों के अनुसार रेहटी तहसील से अतिक्रमण के खिलाफ नोटिस जारी कर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की गई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। मामले ने क्षेत्र में वन संरक्षण और राजस्व भूमि की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Mukesh Mehta
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