विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति कल्याण के लोगों को मुख्य धारा से जोड़े जाने के लिये राज्य सरकार द्वारा हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। इनके सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधार के लिये राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाएँ चलाई हैं। विमुक्ति दिवस  के अवसर पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री रामखेलावन पटेल ने जन-प्रतिनिधियों से कहा कि इन योजनाओं को जन-सामान्य तक पहुँचाने के लिये सहयोग करने का आग्रह किया। 

राज्य मंत्री पटेल ने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में विमुक्त घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु जनजाति कल्याण विभाग का पृथक से गठन किया गया है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री निवास पर इन वर्गों के विकास के लिये पंचायत भी आयोजित की गई थी। विमुक्त जनजाति के गौरव इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में इन वर्गों के साहसिक योगदान को दबाने के लिये ब्रिटिश सरकार ने विमुक्त जाति को आपराधिक घोषित कर दिया था। देश की आजादी के बाद 31 अगस्त 1952 में संसद में बिल लाकर इस काले कानून को हटाया गया।

उन्होंने कहा कि इन वर्गों के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिये सारा खर्च राज्य सरकार उठा रही है। इस योजना में प्रदेश में 8 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभ ले रहे हैं। विमुक्त जाति में से कुछ जातियाँ वर्ष भर भ्रमण करती हैं। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिये पहले एडमिशन के आधार पर दूसरे स्कूल में एडमिशन दिये जाने की सुविधा दी जा रही है। प्रत्येक जिले में इन वर्गों की योजनाओं के ठोस क्रियान्वयन के लिये जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटियाँ गठित कर दी गई हैं। सर्वोदय, ज्ञानोदय, एकलव्य विद्यालय एवं छात्रावासों में इन वर्गों के बच्चों की पढ़ाई के लिये 2 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं।

Mukesh Mehta
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