प्रशासनिक अमला रहा मौजूद, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में ग्रामीणों की अपेक्षित भागीदारी नहीं

 

उमस और गर्मी में परेशान दिखे हितग्राही, अधिकारियों के लिए कूलर की व्यवस्था

 

 

 

मुकेश मेहता

सीहोर/सलकनपुर। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को देवी धाम सलकनपुर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा, डीआईजी ग्रामीण राजेश चंदेल, कलेक्टर बालागुरु के., पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। क्षेत्रीय विधायक रमाकांत भार्गव ने दीप प्रज्वलित कर शिविर का शुभारंभ किया।

 

ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण के लिए विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए थे। लेकिन अधिकारियों की बड़ी मौजूदगी के बावजूद शिविर में अपेक्षित संख्या में ग्रामीण नहीं पहुंचे। पूरे शिविर में महज 48 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 39 का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि 9 आवेदन संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे गए।

 

50 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका शिविर

 

जनसमस्या निवारण के उद्देश्य से आयोजित शिविर में 50 से भी कम आवेदन पहुंचना चर्चा का विषय रहा। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार उन्हें शिविर के आयोजन की पर्याप्त जानकारी समय रहते नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि आसपास के गांवों में पहले से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता तो बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर शिविर में पहुंच सकते थे।

 

ऐसे में करोड़ों की योजनाओं और प्रशासनिक अमले के बीच आयोजित जनविश्वास शिविर में ग्रामीणों की कम भागीदारी ने प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। जनसमस्या निवारण शिविर की सफलता केवल अधिकारियों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि आम नागरिकों की प्रभावी भागीदारी और अधिक से अधिक समस्याओं के सामने आने से तय होती है।

 

अधिकारियों के लिए कूलर, हितग्राही उमस में परेशान

 

शिविर स्थल पर उमस और गर्मी का असर भी दिखाई दिया। अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे हितग्राही गर्मी और उमस से परेशान नजर आए। दूसरी ओर अधिकारियों के बैठने वाले स्थान पर कूलर की व्यवस्था की गई थी। इस व्यवस्था को लेकर भी शिविर में आए लोगों के बीच चर्चा होती रही। ग्रामीणों का कहना था कि जब आम नागरिक अपनी समस्या लेकर शिविर में पहुंचता है तो उसके लिए भी पर्याप्त छायादार और सुविधाजनक व्यवस्था होना जरूरी है।

 

कमिश्नर बोले—शिविर के साथ संस्थाओं का निरीक्षण भी होगा

 

संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने कहा कि जनविश्वास अभियान के पीछे उद्देश्य यह है कि जिले और ब्लॉक स्तर के अधिकारी शिविर लगाकर आम लोगों से सीधे संवाद करें। इसके साथ ही ब्लॉक की शासकीय संस्थाओं, जैसे स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान जो कमियां सामने आएंगी, उनमें सुधार के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने उद्यमी दीदियों और हितग्राहियों से संवाद कर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया।

 

डीआईजी ने बताया—पुलिस का जनविश्वास सीधे संवाद और जागरूकता से

 

डीआईजी ग्रामीण राजेश चंदेल ने कहा कि पुलिस के लिए जनविश्वास का अर्थ आम लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना है। उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा साइबर फ्रॉड से बचाव और नशा मुक्ति को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

 

उन्होंने लोगों को साइबर ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी। पुलिस की साइबर जागरूकता मुहिम में आम तौर पर अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, OTP, UPI PIN, CVV और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा फर्जी KYC, बैंक अधिकारी, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन निवेश जैसे झांसे से सावधान रहने पर जोर दिया जाता है। मध्यप्रदेश पुलिस भी इन तरीकों को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है।

 

यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी हो जाती है तो तुरंत 1930 पर कॉल करना और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार 1930 साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए 24×7 हेल्पलाइन है।

 

नशे से दूर रहने का संदेश

 

डीआईजी राजेश चंदेल ने नशा मुक्ति अभियान का भी उल्लेख करते हुए युवाओं और आम नागरिकों को नशे से दूर रहने तथा परिवार और समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। पुलिस के अनुसार नशे की रोकथाम के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि युवाओं, विद्यार्थियों और परिवारों के बीच लगातार जागरूकता भी जरूरी है।

 

प्रशासनिक अमला मौजूद, लेकिन जनता की मौजूदगी रही कम

 

शिविर में एसडीएम बुधनी संजीव कुमार नागु, जनपद सीईओ जितेंद्र सिंह धाकरे, तहसीलदार रेहटी सपना झिरोलिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

 

हालांकि, 48 आवेदन और 39 मौके पर निराकरण का आंकड़ा प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है, लेकिन ग्रामीणों की कम भागीदारी यह सवाल भी छोड़ गई कि क्या शिविर की जानकारी पर्याप्त रूप से गांव-गांव तक पहुंचाई गई थी। जनविश्वास अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आने वाले शिविरों में व्यापक पूर्व सूचना, गांव स्तर पर प्रचार-प्रसार और आम नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत दिखाई देती है।

Mukesh Mehta
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