18 महीने की उम्र में सुनाया पूरा हिंदू मंत्र, 16 योगासन सहित सैकड़ों चीजों की पहचान कर दिखाई अद्भुत स्मरण शक्ति

 

मुकेश मेहता

रेहटी। आज के दौर में जब छोटे बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया में अधिक समय बिताते नजर आते हैं, वहीं सीहोर जिले की रेहटी तहसील की महज दो वर्ष दो माह की आध्या पालीवाल ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति, सीखने की क्षमता और बहुमुखी प्रतिभा से एक मिसाल कायम की है। नन्हीं आध्या ने अपनी प्रतिभा के दम पर ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज कराकर रेहटी सहित पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

 

आध्या पालीवाल, पिता विजय पालीवाल, ने इतनी कम उम्र में अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि हर कोई आश्चर्यचकित रह गया। आध्या को 30 जून 2026 को ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ द्वारा “सुपर टैलेंटेड किड” की उपाधि से सम्मानित किया गया तथा उनकी प्रतिभा को “वन इन ए मिलियन” के रूप में मान्यता दी गई।

 

18 महीने की उम्र में सुनाया पूरा मंत्र

 

आध्या के परिजनों के अनुसार उनकी असाधारण स्मरण शक्ति का पहला संकेत तब मिला, जब उन्होंने महज 18 महीने की उम्र में एक पूरा हिंदू मंत्र बिना रुके सुनाकर परिवार के सदस्यों को हैरान कर दिया। इसके बाद परिजनों ने उनकी प्रतिभा को समझते हुए सीखने के लिए प्रोत्साहित किया और देखते ही देखते आध्या ने अनेक विषयों को अपनी स्मृति में याद कर लिया।

 

हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला से लेकर 100 तक गिनती

 

आध्या ने हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, सप्ताह के दिनों के नाम, महीनों के नाम, विलोम शब्द, बॉडी पार्ट्स सहित कई सामान्य ज्ञान से जुड़ी चीजों को कम उम्र में ही याद कर लिया। इतना ही नहीं, वह 100 तक की गिनती भी आसानी से सुना लेती हैं। उन्होंने 10 हिंदू मंत्रों को भी याद कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

 

16 योगासन कर दिखाई शारीरिक दक्षता

 

आध्या की प्रतिभा केवल याददाश्त तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता, संतुलन और एकाग्रता का प्रदर्शन करते हुए 16 अलग-अलग योगासन आसानी से करके दिखाए। इतनी कम उम्र में योगासनों का प्रदर्शन भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।

 

80 जानवर और 20 पक्षियों की पहचान

 

आध्या ने अपनी स्मरण शक्ति का परिचय देते हुए 20 पक्षियों, 22 सब्जियों और 80 जानवरों की पहचान करने की क्षमता भी विकसित की है। इसके अलावा वह 16 प्रकार के यातायात के साधनों, विभिन्न फलों और अलग-अलग आकारों को भी पहचान लेती हैं।

 

रिकॉर्ड बनने के बाद भी सीखने का सिलसिला जारी

 

खास बात यह है कि रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद भी आध्या का सीखने का सिलसिला रुका नहीं है। अब वह ग्रहों के नाम, हिंदू महीनों के नाम, विभिन्न राज्यों की राजधानियां और हिंदी में दिनों के नाम भी बखूबी जानने लगी हैं।

 

परिवार के लिए गर्व का पल

 

आध्या की इस विलक्षण प्रतिभा से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में बच्ची की असाधारण याददाश्त और सीखने की क्षमता देखकर उन्हें स्वयं भी गर्व और आश्चर्य होता है। परिवार आध्या की प्रतिभा को आगे बढ़ाने और उसे बेहतर अवसर देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

 

महज दो साल की उम्र में आध्या पालीवाल ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उनकी उपलब्धि न केवल परिवार के लिए बल्कि रेहटी और सीहोर जिले के लिए भी गौरव का विषय है।

Mukesh Mehta
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