सीहोर। बुजुर्गों की देखरेख करना, कई बार एक चुनौतीपूर्ण काम हो जाता है। समय के साथ हमारी उम्र बढ़ती है, लेकिन हर कोई इस स्थिति का सामना शांति और धैैर्य के साथ नहीं करता। उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों को ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है। इस उम्र में वे छोटे बच्चों की तरह संवेदनशील हो जाते हैं। बात-बात पर रूठना, गुस्सा और जिद करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हो जाता है। अक्सर देखा जाता है कि वह बच्चों की जरा-सी भी अनदेखी सहन नहीं कर पाते। कभी वे बहुत खुश रहते हैं, तो कभी छोटी-सी बात का बुरा मान जाते हैं। इसके अलावा मौसम परिवर्तन के कारण भी वृद्धजनो की काफी केयर की जाती है। उक्त विचार शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित वृद्धाश्रम में दो दर्जन से अधिक वृद्धजनों को संबोधित करते हुए हुए जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. फैजल सिद्दकी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर के दौरान कहे। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। वृद्धजन किस तरह से मानसिक रूप से व्यस्त रहे। इसका ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से दवाई आदि पर ध्यान देने की बात भी उन्होंने कही। इस संबंध में जानकारी देते हुए संकल्प नशा मुक्ति केन्द्र के संचालक राहुल सिंह ने बताया कि जिला स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान में गुरुवार को एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान यहां पर मौजूद डॉ. सिद्दकी और स्टाफ ने वृद्धजनों का बीपी, शुगर सहित अन्य जांच के बाद दवाई दी और मानसिक बिमारियों से कैसे बचे इस संबंध में सलाह दी। शिविर के दौरान वृद्धाश्रम के प्रबंधक राकेश शर्मा आदि शामिल थे।

Mukesh Mehta
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